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कोविड राष्ट्रीय महामारी नीति के संदर्भ में कवरेज

कोविड-19 महामारी की 'दूसरी लहर' ने भारत को बुरी स्थिति में छोड़ दिया है। संक्रमित हुए मरीजों की संख्या एक दिन में 3 लाख से अधिक की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है और एक दिन में होने वाली मौतों की संख्या 3000 से अधिक है। अस्पताल कम ऑक्सीजन पर चल रहे हैं। लोगों को जरूरी दवाओं की भी कमी नजर आ रही है। इस दूसरी लहर को रोकने के लिए सभी मोर्चों पर टीकाकरण के संख्या को बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है। इस संदर्भ में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बोबडे की पीठ ने 22 अप्रैल को स्थिति का स्वत: संज्ञान लिया। वे ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए स्टरलाइट संयंत्र को फिर से खोलने की वेदांता की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। पीठ में जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस रवींद्र भट भी शामिल रहे । मुख्य न्यायाधीश ने उच्च न्यायालयों के अलग -अलग नज़रियों को रेखांकित किया था और एक 'राष्ट्रीय योजना' बनाने की मांग की थी। पीठ ने राज्यों, संघ और उच्च न्यायालयों के समक्ष सभी पक्षों को नोटिस जारी किया।

स्वतः संज्ञान

23 अप्रैल 2021

इसके बाद 23 अप्रैल को मामले की सुनवाई हुई। न्याय मित्र नियुक्त किए गए हरीश साल्वे ने इस्तीफा देने का अनुरोध किया। ऐसा इसलिए था क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि संवेदनशील मामले की सुनवाई 'किसी “ साये” के तहत हो। उन्होंने तर्कों का हवाला दिया कि चुकी वो वेदांता का प्रतिनिधित्व कर रहे थे इसलिए हितों का टकराव था, और वह मुख्य न्यायाधीश के बचपन के दोस्त थे। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे उच्च न्यायालय के कामों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते थे। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को इस बारे में चिंता थी और उसने एक दिन पहले तत्काल हस्तक्षेप दर्ज किया था। सॉलिसिटर जनरल ने व्यापक जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इसलिए, हरीश साल्वे को खुद को अलग करने की अनुमति देते हुए एक आदेश पारित किया गया और मामले को दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

27 अप्रैल, 2021

मुख्य न्यायाधीश बोबडे 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए थे। 27 अप्रैल को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो उनकी जगह जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने ले ली। इस सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने उच्च न्यायालयों को उनके काम से हटाने की कोशिश नहीं की थी। अनुच्छेद 226 के तहत उनका व्यापक अधिकार क्षेत्र है और उच्च न्यायालय जमीनी हकीकत को समझने के लिए बेहतर स्थिति में थे। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय एक 'मूकदर्शक' नहीं हो सकता है और राष्ट्रीय, व्यवस्थित और अंतरराज्यीय मुद्दों को संबोधित करने में एक पूरक की भूमिका निभाता है। चूंकि बेंच और अन्य वकीलों को संघ की योजना पर विचार करने के लिए समय की आवश्यकता थी, इसलिए न्यायालय वास्तविक मुद्दों पर विचार नहीं किया । उन्होंने दो नए न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और जयदीप गुप्ता को नियुक्त किए। राजस्थान राज्य ने टैंकरों को जब्त करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को ठीक करने की भी मांग की थी। अदालत ने उन्हें इसके बजाय दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया।

पीठ ने एक आदेश भी पारित किया जिसमें उन मुद्दों का एक संभावित ढांचा प्रदान किया गया था जिन्हें वे संभालना चाहते थे। इसमें निम्नलिखित मुद्दे शामिल थे:

  • ऑक्सीजन की अनुमानित मांग और इसकी आपूर्ति की निगरानी और वृद्धि के लिए उठाए गए कदम।

  • राज्यों को ऑक्सीजन आवंटित करने और राज्यों की आवश्यकताओं पर दैनिक संचार सुनिश्चित करने का आधार।

  • बिस्तरों और उपचार केंद्रों की उपलब्धता।

  • अस्पतालों में रोगियों को भर्ती करने के लिए मानदंड सुनिश्चित करने वाली नीति।

  • आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों और जमाखोरी को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाएं।

  • जिलों और राज्यों से दवाओं की आवश्यकता के बारे में दैनिक संचार सुनिश्चित करना

  • टीकों की अनुमानित आवश्यकता और दूसरी खुराक को प्रशासित करने सहित मौजूदा घाटे को दूर करने के लिए उन्हें प्राप्त करने के लिए कदम।

  • राज्यों को टीके आवंटित करने की पद्धति और टीकों के मूल्य निर्धारण का औचित्य (संघ और राज्यों के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण सहित)।




बेंच ने केंद्र की नीति की जांच की

30 अप्रैल, 2021

सुनवाई के तीसरे दिन न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल, तुषार मेहता द्वारा प्रस्तुत हलफनामे को संबोधित किया। उन्होंने इस सुनवाई में बेंच की संवाद- भूमिका पर जोर दिया। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दोहराया कि स्थानीय महत्व के मामलों को उच्च न्यायालयों में उठाया जाना चाहिए जबकि सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों और सीमा -पार की चिंताओं से निपटता है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने हलफनामे को संबोधित करते हुए उन वर्गों को उजागर किया जिसमें अधिक स्पष्टता की आवश्यकता थी। और ऐसे सवाल किए जिसका हलफनामे में जवाब नहीं दिया गया था। इन मुद्दों में मोटे तौर पर शामिल हैं-

  • केंद्र से राज्यों को ऑक्सीजन आपूर्ति और आवंटन की व्यवस्था के बारे में जानकारी।

  • वितरण की तर्कसंगतता पर बल देते हुए ऑक्सीजन की उपलब्धता के संबंध में व्यक्तियों और राज्यों को सूचना की उपलब्धता।

  • फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए टीकाकरण अभियान।

  • लॉकडाउन के रूप में प्रतिबंधों को केंद्र ने वायरस पर रोक लगाने का विचार किया है।

  • केंद्र द्वारा वैक्सीन प्राप्त करने के लिए COWIN ऐप पर पंजीकरण अनिवार्य करने के कारण इंटरनेट के बिना उन लोगों तक पहुंच के संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और जागरूकता के प्रश्न।

  • एक राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल की व्यवहार्यता जहां केंद्र राज्य सरकारों और केंद्र के लिए वैक्सीन की अलग-अलग कीमतों को कम करने के लिए राज्य सरकारों को आवंटन से पहले उपलब्ध दवा का 100% खरीदता है।

  • पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 92 और 100 के तहत अनिवार्य लाइसेंसिंग को लागू करने की अदालत की क्षमता यानी, किसी और को विशेष रूप से राष्ट्रीय संकट की स्थिति में मालिक की सहमति के बिना पेटेंट -उत्पाद का उत्पादन करने की अनुमति देना।

  • म्यूटेंट स्ट्रेन पर नज़र रखने, प्रवेश और उपचार के लिए अस्पताल के मानकों को नियंत्रित करने, पेटेंट अधिनियम के तहत अनुमति के अनुसार जेनेरिक दवाओं का आयात करने और सुविधाओं की कमी वाले राज्यों के लिए पता लगाने में केंद्र की जिम्मेदारी है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संकट के समय में एक सूचित नागरिक के महत्व पर जोर देने के लिए पुट्टास्वामी में अपनी राय का भी उल्लेख किया। देश में सूचना को बंद करने के किसी भी प्रयास की कड़ी निंदा की गई, यह एक ऐसी स्थिति थी जिससे सॉलिसिटर जनरल भी सहमत थे।

3-न्यायाधीशों की पीठ ने भी बार-बार और मजबूती से जोर दिया कि यह सुनवाई प्रतिकूल नहीं है और इसका एकमात्र उद्देश्य देश को महामारी से बाहर निकालने में मदद करना था।

दवा मूल्य निर्धारण

न्यायमूर्ति भट्ट ने वर्तमान परिदृश्य में दवा मूल्य निर्धारण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आगे कहा कि भारत ट्रिप्स (बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं) में सबसे आगे था जब अनिवार्य लाइसेंसिंग के मुद्दे पर और दवाओं का उत्पादन करने वाले संगठनों को पर्याप्त अनुदान प्राप्त हुआ था। न्यायमूर्ति भट्ट ने सॉलिसिटर जनरल को बताया कि केंद्र के पास एक निर्धारित मूल्य को अनिवार्य करने की शक्ति है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने हाशिए पर पड़े लोगों तक पहुंच के बारे में सवाल पूछे। केंद्र द्वारा 18-44 आयु वर्ग के लोगों को समर्पित 50% टीकों में से एक महत्वपूर्ण अनुपात इन मार्जिन में आता है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने वर्तमान समय में एक राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल की आवश्यकता के संबंध में अपनी बात को आगे बढ़ाने के लिए इस दुर्दशा पर प्रकाश डाला। न्यायमूर्ति भट्ट ने संसाधनों के आवंटन का निर्णय लेने वाले निजी निर्माताओं की वर्तमान स्थिति पर नाराजगी व्यक्त किया और कहा कि एक निजी निर्माता "... एक सार्वजनिक वस्तु के आवंटन का फैसला नहीं कर सकता है और समानता प्रदान नहीं कर सकता"। इसके बाद उन्होंने सॉलिसिटर जनरल को केंद्र को यह बताने और टीकों की उपलब्धता बढ़ाने का निर्देश दिया।

ऑक्सीजन की वृद्धि और उपलब्धता

इसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल से ऑक्सीजन की कमी की समस्या के कारण के बारे में सवाल किया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि समस्याएं ऑक्सीजन की उपलब्धता में नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकारों की ऑक्सीजन को "उठाने" यानी परिवहन और संभालने की असमर्थता में हैं। दिल्ली में कमी के विषय पर सॉलिसिटर जनरल ने एक आपूर्तिकर्ता के एक पत्र का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑक्सीजन को उठाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली एक गैर-औद्योगिक राज्य है और ऑक्सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें आयात करना पड़ता है। निवेदन यह था कि केंद्र और परोपकारी उद्योग ऐसा करने में सहायता प्रदान कर रहे थे।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल को इस तथ्य के साथ जवाब दिया कि केंद्र सरकार अभी भी दिल्ली के नागरिकों के लिए जिम्मेदार थी और कमी को दूर करने के संभावित तरीके के रूप में स्टील क्षेत्र में वर्तमान में अधिक ऑक्सीजन की उपलब्धता का उल्लेख किया। सॉलिसिटर जनरल ने इस तरह की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी दिशा का परिणाम दूसरे क्षेत्र में भटकाव से भी होगा जो कि असुरक्षित भी हो सकता है।

ऑक्सीजन परिवहन और आवंटन तंत्र

मुख्य सचिव सुमिता डावरा ने ऑक्सीजन वितरण एवं आवंटन के लिए प्रयोग की जा रही व्यवस्था के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी। मुख्य सचिव डावरा ने भी अपने समय का उपयोग राज्यों, विशेष रूप से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों की जरूरतों की निगरानी और जरूरतमंद लोगों को संसाधनों को निर्देशित करने में वर्चुअल नियंत्रण कक्ष की प्रभावशीलता पर विस्तार करने के लिए किया।

उन्होंने बताया कि कैसे नियंत्रण कक्ष की स्थापना के समय एक समझ था कि उनके द्वारा बनाया गया ढांचा कठोर नहीं हो सकता क्योंकि यह एक उभरता हुआ संकट है जिसमें लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है। पीठ से पूछताछ पर, डावरा और सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि राज्यों को केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से रियल-टाइम अपडेट प्रदान किया जा रहा है और डेटा फिर से प्राप्त करने के लिए नियमित पहुंच दी जा रही है। केंद्र और नियंत्रण कक्ष की पहुचात्मक भूमिका को ज्यादातर सुविधाजनक बताया गया और यह कहा गया की यह एक ऐसा मंच प्रदान करे जहां राज्यों और अन्य लोग अपनी भूमिका निभा सके।

मध्यस्थी आवेदन

सुनवाई में कई पक्ष मौजूद थे, जो राज्य सरकारों, हित समूहों और व्यक्तियों सहित विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व करते थे। पीठ ने निर्देश दिया कि जिन लोगों के पास वार्ता के लिए आवेदन हैं, उन्हें इस मामले के लिए न्याय मित्र के पास आवेदन जमा करना होगा। इस मामले के लिए न्याय मित्र को यह तय करने का काम सौंपा गया है कि भविष्य की सुनवाई में अदालत द्वारा किन मध्यस्थी आवेदनों पर सुनवाई की जाएगी। उनकी सहायता के लिए एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड नियुक्त करने के उनके अनुरोध को स्वीकार कर उन्होंने अधिवक्ता मोहित राम और कुणाल चटर्जी को नियुक्त किया।

दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति

5 मई, 2021

दिल्ली को ऑक्सीजन की आपूर्ति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने में विफल रहने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य और केंद्र के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​​​कार्यवाही शुरू की।

बेंच ने यह समझने के लिए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया, प्रत्येक राज्य की आवश्यकता की गणना के तंत्र पर स्पष्टीकरण मांगा। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सॉलिसिटर जनरल द्वारा प्रस्तुत फार्मूले को खारिज कर दिया जो राष्ट्रीय स्तर पर ऑक्सीजन की आवश्यकता वाले बिस्तरों की संख्या पर आधारित था। यह नियम इस आधार पर था कि उन मान्यताओं पर आधारित था जो अलग-अलग राज्यों पर विचार करते समय सटीक नहीं हो सकती हैं। सॉलिसिटर जनरल ने दिल्ली में दैनिक ऑक्सीजन प्रवाह का विवरण प्रस्तुत किया। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सुझाव दिया कि केंद्र मुंबई मॉडल को दोहराने का प्रयास करें जिसे मुंबई नगर निगम ने समान परिस्थितियों में अपनाया था। इस मॉडल के परिणामस्वरूप, ऑक्सीजन का एक बफर स्टॉक बनाए रखा गया था, जिसे बेंच ने केंद्र से अपनी ओर से लागू करने का जोर देकर आग्रह किया।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ के आदेश में उन्होंने समस्या के उन क्षेत्रों की पहचान की जिन्हे केंद्र से तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

  • सबसे पहले, मौजूदा फॉर्मूले की कार्यप्रणाली को बताने के लिए और उपलब्ध बिस्तरों के अलावा इन आधार को शामिल कर इसे अपडेट करने की आवश्यकता।

  • दूसरा, एक बेहतर आपूर्ति श्रृंखला और एक बफर स्टॉक के साथ ऑक्सीजन को ठीक से प्रबंधित और अनुकूलित करने की आवश्यकता।

  • तीसरा, वास्तविक उपलब्धता का संचार जो एक हिसाब - किताब के जरिये किया जाए ।

अदालत ने यह स्पष्ट करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के अवमानना ​​आदेश पर रोक लगा दी कि यह स्थिति पर नज़र रखने के उनके प्रयासों में उच्च न्यायालय पर प्रतिबंध के रूप में कार्य नहीं करेगा।

6 मई, 2021

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जारी अवमानना ​​नोटिस पर स्थगन आदेश के बाद, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह ने दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए केंद्र की व्याख्या और योजना को सुना। सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता और अतिरिक्त सचिव सुश्री सुमित्रा डावरा ने ऑक्सीजन टैंकों के परिवहन की योजना सहित आपूर्ति के लिए केंद्र की योजना प्रस्तुत की। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जहां दिल्ली में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति है, वहीं कमी की समस्या व्यवस्थागत विफलता के कारण हो रही है। इसमें परिवहन में अक्षमताएं शामिल हैं, जैसे बड़ी आपूर्ति को उतारने में लगने वाला समय। वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राहुल मेहरा ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडरों के आवंटन में समस्याएं हैं। कुछ राज्यों को उनके अनुरोध से अधिक आवंटित किया जा रहा था, जबकि दिल्ली जैसे अन्य राज्यों को कम आपूर्ति की जा रही थी। उन्होंने सुझाव दिया कि आवंटन केंद्र द्वारा किया जाना चाहिए।

न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा और श्री जयदीप गुप्ता ने कहा कि योजना अदूरदर्शी थी और भविष्य के लिए अनुमानों को नहीं देखती थी। उन्होंने कहा कि अनुमान का प्रस्ताव देने के लिए विशेषज्ञों और महामारी वैज्ञानिकों से सलाह ली जा सकती है।

बेंच ने नीचे दिए गए कुछ सूचीबद्ध मुद्दों पर प्रकाश डाला:

  • बफर स्टॉक: उन्होंने कर्नाटक जैसे राज्यों में मांग में अचानक वृद्धि और ऑक्सीजन के बफर स्टॉक की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। जब कुछ अवसरों पर आपूर्ति गिरती है, तो भंडारण इकाइयों के पास बफर स्टॉक होना चाहिए।

  • स्वास्थ्य कर्मी : स्वास्थ्य कर्मियों की सख्त जरूरत पर भी ध्यान दिया जाए , क्योंकि वे महामारी की शुरुआत से ही अधिक काम कर रहे हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने मौजूदा मानव संसाधनों जैसे कि नीट पीजी के उम्मीदवारों और प्रशिक्षित नर्सों के उपयोग का सुझाव दिया। नीट पीजी के उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स के साथ प्रोत्साहित किया जाए।

  • ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा : पीठ ने यह भी कहा कि मुंबई और दिल्ली जैसे शहर योजनाएं विकसित कर रहे हैं, तब एक गतिशील अखिल भारतीय योजना बनाना महत्वपूर्ण है। इस तरह की योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति की सुविधा होनी चाहिए, जहां अक्सर प्राथमिक स्वास्थ्य लचर होती हैं।

  • तीसरी लहर: न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि संभावित तीसरी लहर के लिए कोई प्रस्तावित योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर उन बच्चों को प्रभावित करेगी जिन्हें वयस्कों के साथ रहने की आवश्यकता होगी, इसलिए इन वयस्कों के जल्दी टीकाकरण की आवश्यकता है।

बेंच ने निम्नलिखित सुझाव दिए:

  • दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति: सोमवार को अगली सुनवाई तक केंद्र द्वारा दिल्ली को कम से कम 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाय।