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विवाह - सामाजिक परिवर्तन के लिए मुख्य संस्था?

पीयू (PEW) रिसर्च सेंटर की नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि अधिकांश भारतीय अंतर्जातीय और अंतर-धार्मिक विवाहों की निंदा करते हैं। बी.आर. अम्बेडकर के लिए यह गहरी चिंता का विषय होता था। संविधान सभा में और साथ ही अन्य जगहों पर, अम्बेडकर ने यह तर्क दिया कि धार्मिक और जातिगत विवाह की परम्परा, भारत की प्रगति को उस तरह का गणतंत्र बनने से रोकेंगे जिसकी उन्होंने और उनके साथी संविधान निर्माताओं ने कल्पना की थी।

अम्बेडकर का मानना ​​​​था कि संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और अन्य मूल्य भारत के सामाजिक संदर्भ में तभी लागू होंगे जब बंधुत्व होगा - जो कि जाति, धर्म और अन्य सामाजिक पदानुक्रमों का विरोधी था। और इसलिए, उन्होंने संविधान सभा में बंधुत्व के महत्व पर जोर दिया और इसे संविधान में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बंधुत्व का प्रचार करने के कई संभावित तरीके हैं: अंतर-जाति-धर्म-भोजन आयोजन, सार्वजनिक स्थानों पर मिलना-जुलना आदि। लेकिन अम्बेडकर ने जिसपर ध्यान आकर्षित किया:

“…The real remedy [against untouchability] is inter-marriage. Fusion of blood can alone create the feeling of being kith and kin, and unless this feeling of kinship, of being kindred, becomes paramount, the separatist feeling—the feeling of being aliens—created by Caste will not vanish…Where society is already well-knit by other ties, marriage is an ordinary incident of life. But where society is cut asunder, marriage as a binding force becomes a matter of urgent necessity.” which translate to-

[...असली उपाय [अस्पृश्यता के खिलाफ] अंतर्विवाह है। खून का सम्बन्ध ही नातेदारी की भावना पैदा कर सकता है, और जब तक नातेदारी की यह भावना सर्वोपरि नहीं हो जाती, जाति द्वारा बनाई गई अलगाववादी भावना-विदेशी (एलियंस) होने की भावना ख़त्म नहीं होगी… जहाँ समाज पहले से ही अन्य बन्धनों से बँधा हुआ है, वहाँ विवाह जीवन की एक सामान्य घटना है। लेकिन जहाँ समाज को बाँट दिया जाता है, वहाँ विवाह एक बाध्यकारी शक्ति के रूप में तत्काल आवश्यकता का विषय बन जाता है।]

अम्बेडकर के लिए, सामाजिक पदानुक्रमों को किस हद तक तोड़ा जा चूका है, इसका मूल्यांकन करने के लिए एक निम्नलिखित विश्वसनीय प्रतिनिधि प्रश्न पूछना जरुरी समझते थे: विभिन्न धर्मों और जातियों के भारतीय एक-दूसरे से कितनी बार शादी करते हैं? क्या भारतीय अंतर्धार्मिक और अंतर्जातीय विवाह का समर्थन करते हैं? उत्तर अम्बेडकर के समय में था: ‘नहीं’। और जैसा कि हाल ही में पीयू (PEW) के अध्ययन से पता चलता है, उत्तर आज भी वही है।

विवाह एक प्रमुख संस्था है जिसका उपयोग प्रमुख सामाजिक समूहों द्वारा जाति और धार्मिक पदानुक्रम को बनाए रखने और जीवित रखने के लिए किया जाता है। अम्बेडकर का बंधुत्व और विवाह का जुड़ाव हमें विवाह को एक प्रमुख संस्था के रूप में ध्यान देने के लिए मजबूर करता है जहाँ संविधान और प्रमुख सामाजिक समूह आपस में लड़ते हैं। इस नजरिये के साथ हम देखते हैं कि, विशेष जाति और धर्म-आधारित विवाह संस्था, 'लव जिहाद' जैसे कानूनों उन घटनाओं से संबंधित हैं, जो संविधान के सामाजिक परिवर्तन के लक्ष्यों के केंद्र में प्रहार करते हैं।

This piece is translated by Kundan Kumar Chaudhary from Constitution Connect.

Read in English here.

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